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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में योगिनी एकादशी 1972 गुरु 6 जुलाई या शुक्र 7 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में योगिनी एकादशी 1972 कब है?

स्मार्त

गुरुवार 6 जुलाई

वैष्णव

शुक्रवार 7 जुलाई

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में गुरु 6 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · शुक्रवार 7 जुलाई

पारण समय
08:47–17:51
9 घं 4 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · शनिवार 8 जुलाई

पारण समय
06:44–17:51
11 घं 7 मि · Tithika की परिपाटी

योगिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • गुरुवार 6 जुलाई
  • 06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 7 जुलाई
  • 08:47–17:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • शुक्रवार 7 जुलाई
  • 06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 8 जुलाई
  • 06:44–17:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंयोगिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में योगिनी एकादशी गुरु 6 जुलाई या शुक्र 7 जुलाई को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में योगिनी एकादशी गुरु 6 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 7 जुलाई को व्रत रखते हैं।

दशमी 06:20 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:20 से 03:31 शुक्र तक।

एकादशी 03:31 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:20 गुरु से 03:31 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 6 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:44: गुरु 6 जुलाई।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 6 जुलाई को दशमी 06:20 तक है, अरुणोदय (05:08–06:44) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:31 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 7 जुलाई को व्रत रखते हैं: शुक्र 7 जुलाई।

व्रत का पारण

स्मार्त · शुक्र 7 जुलाई, 08:47–17:51 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 7 जुलाई 03:31 से शनि 8 जुलाई 00:37 तक है; हरिवासर 08:47 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:51) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:57 तक, करते हैं।

वैष्णव · शनि 8 जुलाई, 06:44–17:51 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शनि 8 जुलाई को 00:37 पर, रात में, अरुणोदय (05:08) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:44) से सूर्यास्त (17:51) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।