tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में योगिनी एकादशी 1949 पारण समय 11:50⁠–⁠17:46, बुध 22 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में योगिनी एकादशी 1949 कब है?

मंगलवार 21 जून

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 21 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 22 जून

पारण समय
11:50–17:46
5 घं 56 मि · Tithika की परिपाटी

योगिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 21 जून
  • 06:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 22 जून
  • 11:50–17:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंयोगिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में योगिनी एकादशी मंगल 21 जून को क्यों है?

योगिनी एकादशी मंगल 21 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:35 से 05:30 बुध तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:30 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 03:35 मंगल से 05:30 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 21 जून को सूर्योदय पर है, 06:42: मंगल 21 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:35 पर, उससे (05:06–06:42) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 22 जून, 11:50–17:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 22 जून 05:30 से गुरु 23 जून 06:51 तक है; हरिवासर 11:50 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:55 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।