tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में योगिनी एकादशी 1909 रवि 13 जून या सोम 14 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में योगिनी एकादशी 1909 कब है?

स्मार्त

रविवार 13 जून

वैष्णव

सोमवार 14 जून

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में रवि 13 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · सोमवार 14 जून

पारण समय
08:56–17:45
8 घं 49 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · मंगलवार 15 जून

पारण समय
06:40–17:45
11 घं 5 मि · Tithika की परिपाटी

योगिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • रविवार 13 जून
  • 06:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 14 जून
  • 08:56–17:45पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • सोमवार 14 जून
  • 06:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 15 जून
  • 06:40–17:45पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंयोगिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में योगिनी एकादशी रवि 13 जून या सोम 14 जून को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में योगिनी एकादशी रवि 13 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 14 जून को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:41 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:41 से 03:23 सोम तक।

एकादशी 03:23 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:41 रवि से 03:23 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 13 जून को सूर्योदय पर है, 06:33: रवि 13 जून।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 13 जून को दशमी 05:41 तक है, अरुणोदय (04:57–06:33) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:23 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 14 जून को व्रत रखते हैं: सोम 14 जून।

व्रत का पारण

स्मार्त · सोम 14 जून, 08:56–17:45 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 14 जून 03:23 से मंगल 15 जून 01:12 तक है; हरिवासर 08:50 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:38) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:46 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · मंगल 15 जून, 06:40–17:45 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी मंगल 15 जून को 01:12 पर, रात में, अरुणोदय (04:58) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:34) से सूर्यास्त (17:38) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।