Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में विजया एकादशी 2039 शुक्र 18 फ़रवरी या शनि 19 फ़रवरी
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में विजया एकादशी 2039 कब है?
स्मार्त
शुक्रवार 18 फ़रवरी
वैष्णव
शनिवार 19 फ़रवरी
फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शुक्र 18 फ़रवरी का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शनिवार 19 फ़रवरी
वैष्णव · रविवार 20 फ़रवरी
विजया एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शुक्रवार 18 फ़रवरी
-
06:08व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 19 फ़रवरी
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10:39–18:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शनिवार 19 फ़रवरी
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06:08व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 20 फ़रवरी
-
06:08–18:43पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में विजया एकादशी शुक्र 18 फ़रवरी या शनि 19 फ़रवरी को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में विजया एकादशी शुक्र 18 फ़रवरी को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शनि 19 फ़रवरी को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:47 से। एकादशी: 06:47 से 05:03 शनि तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:03 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:47 शुक्र से 05:03 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शुक्र 18 फ़रवरी को 06:47 पर, उस सूर्योदय (06:08) के बाद, लगती है और शनि 19 फ़रवरी को 05:03 पर, अगले सूर्योदय (06:08 शनि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शुक्र 18 फ़रवरी।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 18 फ़रवरी को अरुणोदय (04:32–06:08) में दशमी है। शनि 19 फ़रवरी को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:03 तक, फिर द्वादशी): शनि 19 फ़रवरी।
व्रत का पारण
स्मार्त · शनि 19 फ़रवरी, 10:39–18:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 19 फ़रवरी 05:03 से रवि 20 फ़रवरी 03:28 तक है; हरिवासर 10:39 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:39 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · रवि 20 फ़रवरी, 06:08–18:43 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 20 फ़रवरी को 03:28 पर, रात में, अरुणोदय (04:32) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:08) से सूर्यास्त (18:43) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।