tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में विजया एकादशी 2020 पारण समय 06:08⁠–⁠07:30, गुरु 20 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में विजया एकादशी 2020 कब है?

बुधवार 19 फ़रवरी

फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 19 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 20 फ़रवरी

पारण समय
06:08–07:30
1 घं 22 मि

विजया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 19 फ़रवरी
  • 06:08व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 20 फ़रवरी
  • 06:08–07:30पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंविजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में विजया एकादशी बुध 19 फ़रवरी को क्यों है?

विजया एकादशी बुध 19 फ़रवरी को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 06:03 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:03 से 06:32 बुध तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:03 मंगल से 06:32 तक।

द्वादशी: 06:32 बुध से 07:30 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, मंगल 18 फ़रवरी को 06:07 और बुध 19 फ़रवरी को 06:08। एकादशी (मंगल 18 फ़रवरी 06:03 से बुध 19 फ़रवरी 06:32 तक) और द्वादशी (बुध 19 फ़रवरी 06:32 से गुरु 20 फ़रवरी 07:30 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: बुध 19 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: मंगल 18 फ़रवरी को दशमी 06:03 तक है, उसके भीतर (04:31–06:07); बुध 19 फ़रवरी को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 20 फ़रवरी, 06:08–07:30

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 19 फ़रवरी 06:32 से गुरु 20 फ़रवरी 07:30 तक है; हरिवासर 12:46 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 20 फ़रवरी को सूर्योदय (06:08) से होता है।

नियम

फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।