tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में विजया एकादशी 1968 पारण समय 05:34⁠–⁠06:15, रवि 25 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में विजया एकादशी 1968 कब है?

शनिवार 24 फ़रवरी

फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 24 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 25 फ़रवरी

पारण समय
05:34–06:15
40 मि · Tithika की परिपाटी

विजया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 24 फ़रवरी
  • 07:10व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 25 फ़रवरी
  • 05:34–06:15पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंविजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में विजया एकादशी शनि 24 फ़रवरी को क्यों है?

विजया एकादशी शनि 24 फ़रवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:56 से। एकादशी: 08:56 से 07:27 शनि तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 08:56 शुक्र से 07:27 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 24 फ़रवरी को सूर्योदय पर है, 07:10: शनि 24 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 08:56 शुक्र पर, उससे (05:34–07:10) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 25 फ़रवरी, 05:34–06:15 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)

द्वादशी रवि 25 फ़रवरी को 06:15 पर, अरुणोदय (05:34) लगने के बाद और सूर्योदय (07:10) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।

नियम

फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।