Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में विजया एकादशी 1921 पारण समय 06:13–09:43, रवि 6 मार्च
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में विजया एकादशी 1921 कब है?
शनिवार 5 मार्च
फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शनि 5 मार्च का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
रविवार 6 मार्च
विजया एकादशी का समय: व्रत, पारण
- शनिवार 5 मार्च
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06:13व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 6 मार्च
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06:13–09:43पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में विजया एकादशी शनि 5 मार्च को क्यों है?
विजया एकादशी शनि 5 मार्च को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 04:45 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:45 से 07:18 शनि तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:45 शुक्र से 07:18 तक।
द्वादशी: 07:18 शनि से 09:43 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शुक्र 4 मार्च को 06:12 और शनि 5 मार्च को 06:13। एकादशी (शुक्र 4 मार्च 04:45 से शनि 5 मार्च 07:18 तक) और द्वादशी (शनि 5 मार्च 07:18 से रवि 6 मार्च 09:43 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शनि 5 मार्च। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शुक्र 4 मार्च को दशमी 04:45 तक है, उसके भीतर (04:36–06:12); शनि 5 मार्च को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 6 मार्च, 06:13–09:43
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 5 मार्च 07:18 से रवि 6 मार्च 09:43 तक है; हरिवासर 13:54 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 6 मार्च को सूर्योदय (06:13) से होता है।
नियम
फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।