tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में विजया एकादशी 1908 गुरु 27 फ़रवरी या शुक्र 28 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में विजया एकादशी 1908 कब है?

स्मार्त

गुरुवार 27 फ़रवरी

वैष्णव

शुक्रवार 28 फ़रवरी

फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में गुरु 27 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · शुक्रवार 28 फ़रवरी

पारण समय
10:36–18:39
8 घं 3 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · शनिवार 29 फ़रवरी

पारण समय
06:11–18:39
12 घं 28 मि · Tithika की परिपाटी

विजया एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • गुरुवार 27 फ़रवरी
  • 06:11व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 28 फ़रवरी
  • 10:36–18:39पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • शुक्रवार 28 फ़रवरी
  • 06:11व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 29 फ़रवरी
  • 06:11–18:39पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंविजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में विजया एकादशी गुरु 27 फ़रवरी या शुक्र 28 फ़रवरी को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में विजया एकादशी गुरु 27 फ़रवरी को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शुक्र 28 फ़रवरी को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:55 से। एकादशी: 07:55 से 05:15 शुक्र तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:15 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:55 गुरु से 05:15 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह गुरु 27 फ़रवरी को 07:55 पर, उस सूर्योदय (06:04) के बाद, लगती है और शुक्र 28 फ़रवरी को 05:15 पर, अगले सूर्योदय (06:04 शुक्र) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 27 फ़रवरी।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 27 फ़रवरी को अरुणोदय (04:28–06:04) में दशमी है। शुक्र 28 फ़रवरी को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:15 तक, फिर द्वादशी): शुक्र 28 फ़रवरी।

व्रत का पारण

स्मार्त · शुक्र 28 फ़रवरी, 10:36–18:39 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 28 फ़रवरी 05:15 से शनि 29 फ़रवरी 02:11 तक है; हरिवासर 10:29 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:33) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:34 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · शनि 29 फ़रवरी, 06:11–18:39 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शनि 29 फ़रवरी को 02:11 पर, रात में, अरुणोदय (04:29) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:05) से सूर्यास्त (18:32) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।