tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 2087 सोम 28 अप्रैल या मंगल 29 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में वरूथिनी एकादशी 2087 कब है?

स्मार्त

सोमवार 28 अप्रैल

वैष्णव

मंगलवार 29 अप्रैल

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में सोम 28 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · मंगलवार 29 अप्रैल

पारण समय
09:54–17:54
8 घं 0 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · बुधवार 30 अप्रैल

पारण समय
06:25–17:53
11 घं 28 मि · Tithika की परिपाटी

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • सोमवार 28 अप्रैल
  • 06:25व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 29 अप्रैल
  • 09:54–17:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • मंगलवार 29 अप्रैल
  • 06:25व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 30 अप्रैल
  • 06:25–17:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में वरूथिनी एकादशी सोम 28 अप्रैल या मंगल 29 अप्रैल को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में वरूथिनी एकादशी सोम 28 अप्रैल को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 29 अप्रैल को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:01 से। एकादशी: 07:01 से 04:38 मंगल तक।

एकादशी 04:38 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 07:01 सोम से 04:38 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह सोम 28 अप्रैल को 07:01 पर, उस सूर्योदय (06:25) के बाद, लगती है और मंगल 29 अप्रैल को 04:38 पर, अगले सूर्योदय (06:25 मंगल) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: सोम 28 अप्रैल।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 28 अप्रैल को अरुणोदय (04:49–06:25) में दशमी है। मंगल 29 अप्रैल को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:38 तक, फिर द्वादशी): मंगल 29 अप्रैल।

व्रत का पारण

स्मार्त · मंगल 29 अप्रैल, 09:54–17:54 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 29 अप्रैल 04:38 से बुध 30 अप्रैल 01:41 तक है; हरिवासर 09:54 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:54) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · बुध 30 अप्रैल, 06:25–17:53 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी बुध 30 अप्रैल को 01:41 पर, रात में, अरुणोदय (04:49) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:25) से सूर्यास्त (17:53) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।