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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 2075 पारण समय 04:45⁠–⁠06:12, शुक्र 12 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में वरूथिनी एकादशी 2075 कब है?

गुरुवार 11 अप्रैल

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 11 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 12 अप्रैल

पारण समय
04:45–06:12
1 घं 27 मि · Tithika की परिपाटी

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 11 अप्रैल
  • 06:21व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 12 अप्रैल
  • 04:45–06:12पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में वरूथिनी एकादशी गुरु 11 अप्रैल को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी गुरु 11 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:07 से। एकादशी: 08:07 से 07:00 गुरु तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 08:07 बुध से 07:00 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 11 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:21: गुरु 11 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 08:07 बुध पर, उससे (04:45–06:21) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 12 अप्रैल, 04:45–06:12 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शुक्र 12 अप्रैल को 06:12 पर, अरुणोदय (04:45) लगने के बाद और सूर्योदय (06:21) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।