Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 2068 शुक्र 27 अप्रैल या शनि 28 अप्रैल
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में वरूथिनी एकादशी 2068 कब है?
स्मार्त
शुक्रवार 27 अप्रैल
वैष्णव
शनिवार 28 अप्रैल
वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शुक्र 27 अप्रैल का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शनिवार 28 अप्रैल
वैष्णव · रविवार 29 अप्रैल
वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शुक्रवार 27 अप्रैल
-
06:25व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 28 अप्रैल
-
08:01–17:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शनिवार 28 अप्रैल
-
06:25व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 29 अप्रैल
-
06:25–17:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में वरूथिनी एकादशी शुक्र 27 अप्रैल या शनि 28 अप्रैल को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में वरूथिनी एकादशी शुक्र 27 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शनि 28 अप्रैल को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:39 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:39 से 02:46 शनि तक।
एकादशी 02:46 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:39 शुक्र से 02:46 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 27 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:25: शुक्र 27 अप्रैल।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 27 अप्रैल को दशमी 05:39 तक है, अरुणोदय (04:49–06:25) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:46 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शनि 28 अप्रैल को व्रत रखते हैं: शनि 28 अप्रैल।
व्रत का पारण
स्मार्त · शनि 28 अप्रैल, 08:01–17:54 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 28 अप्रैल 02:46 से शनि 28 अप्रैल 23:45 तक है; हरिवासर 08:01 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:54) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं।
वैष्णव · रवि 29 अप्रैल, 06:25–17:54 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 29 अप्रैल को 23:45 शनि पर, रात में, अरुणोदय (04:49) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:25) से सूर्यास्त (17:54) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।