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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में वरूथिनी एकादशी 2037 पारण समय 06:26⁠–⁠14:11, रवि 12 अप्रैल

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में वरूथिनी एकादशी 2037 कब है?

शनिवार 11 अप्रैल

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में शनि 11 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 12 अप्रैल

पारण समय
06:26–14:11
7 घं 45 मि

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 11 अप्रैल
  • 06:27व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 12 अप्रैल
  • 06:26–14:11पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में वरूथिनी एकादशी शनि 11 अप्रैल को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी शनि 11 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:55 से। एकादशी: 08:55 से 11:35 शनि तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 08:55 शुक्र से 11:35 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 11 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:27: शनि 11 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 08:55 शुक्र पर, उससे (04:51–06:27) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 12 अप्रैल, 06:26–14:11

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 11 अप्रैल 11:35 से रवि 12 अप्रैल 14:11 तक है; हरिवासर 18:14 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 12 अप्रैल को सूर्योदय (06:26) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:04 तक, करते हैं।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।