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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 2036 पारण समय 06:24⁠–⁠07:42, बुध 23 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में वरूथिनी एकादशी 2036 कब है?

मंगलवार 22 अप्रैल

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 22 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 23 अप्रैल

पारण समय
06:24–07:42
1 घं 18 मि

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 22 अप्रैल
  • 06:23व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 23 अप्रैल
  • 06:24–07:42पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में वरूथिनी एकादशी मंगल 22 अप्रैल को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी मंगल 22 अप्रैल को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 05:04 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:04 से 06:43 मंगल तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:04 सोम से 06:43 तक।

द्वादशी: 06:43 मंगल से 07:42 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, सोम 21 अप्रैल को 06:23 और मंगल 22 अप्रैल को 06:23। एकादशी (सोम 21 अप्रैल 05:04 से मंगल 22 अप्रैल 06:43 तक) और द्वादशी (मंगल 22 अप्रैल 06:43 से बुध 23 अप्रैल 07:42 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: मंगल 22 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: सोम 21 अप्रैल को दशमी 05:04 तक है, उसके भीतर (04:47–06:23); मंगल 22 अप्रैल को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 23 अप्रैल, 06:24–07:42

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 22 अप्रैल 06:43 से बुध 23 अप्रैल 07:42 तक है; हरिवासर 12:58 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 23 अप्रैल को सूर्योदय (06:24) से होता है।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।