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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में वरूथिनी एकादशी 2028 पारण समय 06:12⁠–⁠19:34, शुक्र 21 अप्रैल

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में वरूथिनी एकादशी 2028 कब है?

गुरुवार 20 अप्रैल

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में गुरु 20 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 21 अप्रैल

पारण समय
06:12–19:34
13 घं 22 मि

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 20 अप्रैल
  • 06:13व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 21 अप्रैल
  • 06:12–19:34पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में वरूथिनी एकादशी गुरु 20 अप्रैल को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी गुरु 20 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 14:44 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 14:44 बुध से 17:17 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 20 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:13: गुरु 20 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 14:44 बुध पर, उससे (04:37–06:13) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 21 अप्रैल, 06:12–19:34

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 20 अप्रैल 17:17 से शुक्र 21 अप्रैल 19:34 तक है; हरिवासर 23:51 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 21 अप्रैल को सूर्योदय (06:12) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:54 तक, करते हैं।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।