Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 2021 पारण समय 06:28–08:51, शनि 8 मई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में वरूथिनी एकादशी 2021 कब है?
शुक्रवार 7 मई
वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शुक्र 7 मई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शनिवार 8 मई
वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
- शुक्रवार 7 मई
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06:27व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 8 मई
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06:28–08:51पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में वरूथिनी एकादशी शुक्र 7 मई को क्यों है?
वरूथिनी एकादशी शुक्र 7 मई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 05:41 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:41 से 07:02 शुक्र तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:41 गुरु से 07:02 तक।
द्वादशी: 07:02 शुक्र से 08:51 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, गुरु 6 मई को 06:27 और शुक्र 7 मई को 06:27। एकादशी (गुरु 6 मई 05:41 से शुक्र 7 मई 07:02 तक) और द्वादशी (शुक्र 7 मई 07:02 से शनि 8 मई 08:51 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शुक्र 7 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: गुरु 6 मई को दशमी 05:41 तक है, उसके भीतर (04:51–06:27); शुक्र 7 मई को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शनि 8 मई, 06:28–08:51
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 7 मई 07:02 से शनि 8 मई 08:51 तक है; हरिवासर 13:29 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 8 मई को सूर्योदय (06:28) से होता है।
नियम
वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।