Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 1997 शुक्र 2 मई या शनि 3 मई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में वरूथिनी एकादशी 1997 कब है?
स्मार्त
शुक्रवार 2 मई
वैष्णव
शनिवार 3 मई
वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शुक्र 2 मई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शनिवार 3 मई
वैष्णव · रविवार 4 मई
वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शुक्रवार 2 मई
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06:26व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 3 मई
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08:47–17:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शनिवार 3 मई
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06:26व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 4 मई
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06:26–17:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में वरूथिनी एकादशी शुक्र 2 मई या शनि 3 मई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में वरूथिनी एकादशी शुक्र 2 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शनि 3 मई को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:57 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:57 से 03:25 शनि तक।
एकादशी 03:25 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:57 शुक्र से 03:25 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 2 मई को सूर्योदय पर है, 06:26: शुक्र 2 मई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 2 मई को दशमी 05:57 तक है, अरुणोदय (04:50–06:26) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:25 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शनि 3 मई को व्रत रखते हैं: शनि 3 मई।
व्रत का पारण
स्मार्त · शनि 3 मई, 08:47–17:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 3 मई 03:25 से रवि 4 मई 00:51 तक है; हरिवासर 08:47 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · रवि 4 मई, 06:26–17:51 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 4 मई को 00:51 पर, रात में, अरुणोदय (04:50) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:26) से सूर्यास्त (17:51) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।