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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 1974 पारण समय 06:22⁠–⁠08:12, शुक्र 19 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में वरूथिनी एकादशी 1974 कब है?

गुरुवार 18 अप्रैल

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 18 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 19 अप्रैल

पारण समय
06:22–08:12
1 घं 50 मि

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 18 अप्रैल
  • 06:22व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 19 अप्रैल
  • 06:22–08:12पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में वरूथिनी एकादशी गुरु 18 अप्रैल को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी गुरु 18 अप्रैल को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 05:44 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:44 से 07:17 गुरु तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:44 बुध से 07:17 तक।

द्वादशी: 07:17 गुरु से 08:12 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, बुध 17 अप्रैल को 06:22 और गुरु 18 अप्रैल को 06:22। एकादशी (बुध 17 अप्रैल 05:44 से गुरु 18 अप्रैल 07:17 तक) और द्वादशी (गुरु 18 अप्रैल 07:17 से शुक्र 19 अप्रैल 08:12 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: गुरु 18 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: बुध 17 अप्रैल को दशमी 05:44 तक है, उसके भीतर (04:46–06:22); गुरु 18 अप्रैल को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 19 अप्रैल, 06:22–08:12

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 18 अप्रैल 07:17 से शुक्र 19 अप्रैल 08:12 तक है; हरिवासर 13:31 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 19 अप्रैल को सूर्योदय (06:22) से होता है।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।