tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 1967 पारण समय 08:43⁠–⁠17:51, शुक्र 5 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में वरूथिनी एकादशी 1967 कब है?

गुरुवार 4 मई

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 4 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 5 मई

पारण समय
08:43–17:51
9 घं 8 मि · Tithika की परिपाटी

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 4 मई
  • 06:26व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 5 मई
  • 08:43–17:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में वरूथिनी एकादशी गुरु 4 मई को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी गुरु 4 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:39 बुध से 02:04 शुक्र तक।

एकादशी 02:04 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 23:39 बुध से 02:04 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 4 मई को सूर्योदय पर है, 06:26: गुरु 4 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:39 बुध पर, उससे (04:50–06:26) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 5 मई, 08:43–17:51 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 5 मई 02:04 से शनि 6 मई 04:40 तक है; हरिवासर 08:43 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:51) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।