tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 1953 पारण समय 06:21⁠–⁠18:06, शनि 11 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में वरूथिनी एकादशी 1953 कब है?

शुक्रवार 10 अप्रैल

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 10 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 11 अप्रैल

पारण समय
06:21–18:06
11 घं 45 मि · Tithika की परिपाटी

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 10 अप्रैल
  • 06:20व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 11 अप्रैल
  • 06:21–18:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में वरूथिनी एकादशी शुक्र 10 अप्रैल को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी शुक्र 10 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 09:11 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 09:11 गुरु से 06:26 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 10 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:20: शुक्र 10 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 09:11 गुरु पर, उससे (04:44–06:20) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 11 अप्रैल, 06:21–18:06 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शनि 11 अप्रैल को 03:19 पर, रात में, अरुणोदय (04:45) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:21) से सूर्यास्त (18:06) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।