tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 1951 पारण समय 06:26⁠–⁠17:53, बुध 2 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में वरूथिनी एकादशी 1951 कब है?

मंगलवार 1 मई

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 1 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 2 मई

पारण समय
06:26–17:53
11 घं 27 मि · Tithika की परिपाटी

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 1 मई
  • 06:25व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 2 मई
  • 06:26–17:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में वरूथिनी एकादशी मंगल 1 मई को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी मंगल 1 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:52 सोम से 18:47 तक।

एकादशी 18:47 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 1 मई को सूर्योदय पर है, 06:25: मंगल 1 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:52 सोम पर, उससे (04:49–06:25) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 2 मई, 06:26–17:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 1 मई 18:47 से बुध 2 मई 19:09 तक है; हरिवासर 00:52 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 2 मई को सूर्योदय (06:26) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।