Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 1940 पारण समय 07:25–17:52, शुक्र 3 मई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में वरूथिनी एकादशी 1940 कब है?
गुरुवार 2 मई
वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 2 मई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शुक्रवार 3 मई
वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
- गुरुवार 2 मई
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06:26व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 3 मई
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07:25–17:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में वरूथिनी एकादशी गुरु 2 मई को क्यों है?
वरूथिनी एकादशी गुरु 2 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:11 बुध से 00:47 शुक्र तक।
एकादशी 00:47 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 2 मई को सूर्योदय पर है, 06:26: गुरु 2 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:11 बुध पर, उससे (04:50–06:26) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 3 मई, 07:25–17:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 3 मई 00:47 से शनि 4 मई 03:20 तक है; हरिवासर 07:25 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं।
नियम
वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।