Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 1935 रवि 28 अप्रैल या सोम 29 अप्रैल
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में वरूथिनी एकादशी 1935 कब है?
स्मार्त
रविवार 28 अप्रैल
वैष्णव
सोमवार 29 अप्रैल
वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 28 अप्रैल का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · सोमवार 29 अप्रैल
वैष्णव · मंगलवार 30 अप्रैल
वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- रविवार 28 अप्रैल
-
06:24व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 29 अप्रैल
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10:21–17:55पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- सोमवार 29 अप्रैल
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06:25व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 30 अप्रैल
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06:25–17:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में वरूथिनी एकादशी रवि 28 अप्रैल या सोम 29 अप्रैल को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में वरूथिनी एकादशी रवि 28 अप्रैल को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव सोम 29 अप्रैल को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:42 से। एकादशी: 07:42 से 05:03 सोम तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:03 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:42 रवि से 05:03 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह रवि 28 अप्रैल को 07:42 पर, उस सूर्योदय (06:24) के बाद, लगती है और सोम 29 अप्रैल को 05:03 पर, अगले सूर्योदय (06:25 सोम) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: रवि 28 अप्रैल।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 28 अप्रैल को अरुणोदय (04:48–06:24) में दशमी है। सोम 29 अप्रैल को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:03 तक, फिर द्वादशी): सोम 29 अप्रैल।
व्रत का पारण
स्मार्त · सोम 29 अप्रैल, 10:21–17:55 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 29 अप्रैल 05:03 से मंगल 30 अप्रैल 02:17 तक है; हरिवासर 10:21 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:55) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · मंगल 30 अप्रैल, 06:25–17:54 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी मंगल 30 अप्रैल को 02:17 पर, रात में, अरुणोदय (04:49) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:25) से सूर्यास्त (17:54) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।