tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 1932 पारण समय 11:41⁠–⁠17:53, रवि 1 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में वरूथिनी एकादशी 1932 कब है?

शनिवार 30 अप्रैल

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 30 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 1 मई

पारण समय
11:41–17:53
6 घं 12 मि · Tithika की परिपाटी

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 30 अप्रैल
  • 06:25व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 1 मई
  • 11:41–17:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में वरूथिनी एकादशी शनि 30 अप्रैल को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी शनि 30 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:58 से 05:04 रवि तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:04 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 02:58 शनि से 05:04 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 30 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:25: शनि 30 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:58 पर, उससे (04:49–06:25) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 1 मई, 11:41–17:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 1 मई 05:04 से सोम 2 मई 07:31 तक है; हरिवासर 11:41 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।