tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 1926 शुक्र 7 मई या शनि 8 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में वरूथिनी एकादशी 1926 कब है?

स्मार्त

शुक्रवार 7 मई

वैष्णव

शनिवार 8 मई

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में शुक्र 7 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · शनिवार 8 मई

पारण समय
09:32–17:50
8 घं 18 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · रविवार 9 मई

पारण समय
06:28–17:49
11 घं 21 मि · Tithika की परिपाटी

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • शुक्रवार 7 मई
  • 06:27व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 8 मई
  • 09:32–17:50पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • शनिवार 8 मई
  • 06:27व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 9 मई
  • 06:28–17:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में वरूथिनी एकादशी शुक्र 7 मई या शनि 8 मई को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में वरूथिनी एकादशी शुक्र 7 मई को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शनि 8 मई को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:32 से। एकादशी: 06:32 से 04:07 शनि तक।

एकादशी 04:07 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:32 शुक्र से 04:07 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शुक्र 7 मई को 06:32 पर, उस सूर्योदय (06:27) के बाद, लगती है और शनि 8 मई को 04:07 पर, अगले सूर्योदय (06:27 शनि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शुक्र 7 मई।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 7 मई को अरुणोदय (04:51–06:27) में दशमी है। शनि 8 मई को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:07 तक, फिर द्वादशी): शनि 8 मई।

व्रत का पारण

स्मार्त · शनि 8 मई, 09:32–17:50 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 8 मई 04:07 से रवि 9 मई 01:44 तक है; हरिवासर 09:32 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:50) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:44 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · रवि 9 मई, 06:28–17:49 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी रवि 9 मई को 01:44 पर, रात में, अरुणोदय (04:52) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:28) से सूर्यास्त (17:49) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।