tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 1924 पारण समय 06:25⁠–⁠14:34, बुध 30 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में वरूथिनी एकादशी 1924 कब है?

मंगलवार 29 अप्रैल

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 29 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 30 अप्रैल

पारण समय
06:25–14:34
8 घं 9 मि

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 29 अप्रैल
  • 06:25व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 30 अप्रैल
  • 06:25–14:34पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में वरूथिनी एकादशी मंगल 29 अप्रैल को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी मंगल 29 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 12:43 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 12:43 सोम से 13:24 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 29 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:25: मंगल 29 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 12:43 सोम पर, उससे (04:49–06:25) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 30 अप्रैल, 06:25–14:34

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 29 अप्रैल 13:24 से बुध 30 अप्रैल 14:34 तक है; हरिवासर 19:42 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 30 अप्रैल को सूर्योदय (06:25) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।