tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 1906 बुध 18 अप्रैल या गुरु 19 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में वरूथिनी एकादशी 1906 कब है?

स्मार्त

बुधवार 18 अप्रैल

वैष्णव

गुरुवार 19 अप्रैल

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में बुध 18 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · गुरुवार 19 अप्रैल

पारण समय
12:22–18:01
5 घं 39 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · शुक्रवार 20 अप्रैल

पारण समय
06:22–07:20
58 मि

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • बुधवार 18 अप्रैल
  • 06:22व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 19 अप्रैल
  • 12:22–18:01पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • गुरुवार 19 अप्रैल
  • 06:22व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 20 अप्रैल
  • 06:22–07:20पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में वरूथिनी एकादशी बुध 18 अप्रैल या गुरु 19 अप्रैल को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में वरूथिनी एकादशी बुध 18 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव गुरु 19 अप्रैल को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:05 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:05 से 05:56 गुरु तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:56 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 05:05 बुध से 05:56 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 18 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:15: बुध 18 अप्रैल।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 18 अप्रैल को दशमी 05:05 तक है, अरुणोदय (04:39–06:15) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 05:56 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव गुरु 19 अप्रैल को व्रत रखते हैं: गुरु 19 अप्रैल।

व्रत का पारण

स्मार्त · गुरु 19 अप्रैल, 12:22–18:01 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 19 अप्रैल 05:56 से शुक्र 20 अप्रैल 07:14 तक है; हरिवासर 12:15 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:54) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:35 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · शुक्र 20 अप्रैल, 06:22–07:20

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 19 अप्रैल 05:56 से शुक्र 20 अप्रैल 07:14 तक है; हरिवासर 12:15 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 20 अप्रैल को सूर्योदय (06:16) से होता है।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।