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दोहा, क़तर में उत्पन्ना एकादशी 2026 पारण समय 06:05⁠–⁠16:43, शनि 5 दिसंबर

व्रत · समय UTC+3 में

दोहा में उत्पन्ना एकादशी 2026 कब है?

शुक्रवार 4 दिसंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

दोहा में शुक्र 4 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 5 दिसंबर

पारण समय
06:05–16:43
10 घं 38 मि · Tithika की परिपाटी

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 4 दिसंबर
  • 06:04व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 5 दिसंबर
  • 06:05–16:43पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

दोहा में उत्पन्ना एकादशी शुक्र 4 दिसंबर को क्यों है?

उत्पन्ना एकादशी शुक्र 4 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:34 गुरु से 21:15 तक।

एकादशी 21:15 शुक्र पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (AST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 4 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:04: शुक्र 4 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:34 गुरु पर, उससे (04:28–06:04) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 5 दिसंबर, 06:05–16:43 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 4 दिसंबर 21:15 से शनि 5 दिसंबर 22:22 तक है; हरिवासर 03:32 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 5 दिसंबर को सूर्योदय (06:05) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (16:43) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:12 तक, करते हैं।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।