tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 2049 शनि 20 नवंबर या रवि 21 नवंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 2049 कब है?

स्मार्त

शनिवार 20 नवंबर

वैष्णव

रविवार 21 नवंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में शनि 20 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · रविवार 21 नवंबर

पारण समय
11:28–18:29
7 घं 1 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · सोमवार 22 नवंबर

पारण समय
05:28–05:40
12 मि

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • शनिवार 20 नवंबर
  • 05:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 21 नवंबर
  • 11:28–18:29पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • रविवार 21 नवंबर
  • 05:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 22 नवंबर
  • 05:28–05:40पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी शनि 20 नवंबर या रवि 21 नवंबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में उत्पन्ना एकादशी शनि 20 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव रवि 21 नवंबर को व्रत रखते हैं।

दशमी 04:26 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:26 से 05:24 रवि तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:24 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 04:26 शनि से 05:24 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 20 नवंबर को सूर्योदय पर है, 05:28: शनि 20 नवंबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 20 नवंबर को दशमी 04:26 तक है, अरुणोदय (03:52–05:28) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 05:24 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव रवि 21 नवंबर को व्रत रखते हैं: रवि 21 नवंबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · रवि 21 नवंबर, 11:28–18:29 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 21 नवंबर 05:24 से सोम 22 नवंबर 05:40 तक है; हरिवासर 11:28 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:29) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:04 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · सोम 22 नवंबर, 05:28–05:40

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 21 नवंबर 05:24 से सोम 22 नवंबर 05:40 तक है; हरिवासर 11:28 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 22 नवंबर को सूर्योदय (05:28) से होता है।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।