tithika
English

Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में उत्पन्ना एकादशी 2030 पारण समय 07:54⁠–⁠17:37, शुक्र 22 नवंबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में उत्पन्ना एकादशी 2030 कब है?

गुरुवार 21 नवंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में गुरु 21 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 22 नवंबर

पारण समय
07:54–17:37
9 घं 43 मि · Tithika की परिपाटी

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 21 नवंबर
  • 07:52व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 22 नवंबर
  • 07:54–17:37पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में उत्पन्ना एकादशी गुरु 21 नवंबर को क्यों है?

उत्पन्ना एकादशी गुरु 21 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:12 से 22:40 तक।

एकादशी 22:40 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 21 नवंबर को सूर्योदय पर है, 07:52: गुरु 21 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:12 पर, उससे (06:16–07:52) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 22 नवंबर, 07:54–17:37 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 21 नवंबर 22:40 से शुक्र 22 नवंबर 20:25 तक है; हरिवासर 04:06 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 22 नवंबर को सूर्योदय (07:54) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:37) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:50 तक, करते हैं।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।