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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में उत्पन्ना एकादशी 2024 पारण समय 08:57⁠–⁠17:35, बुध 27 नवंबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में उत्पन्ना एकादशी 2024 कब है?

मंगलवार 26 नवंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में मंगल 26 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 27 नवंबर

पारण समय
08:57–17:35
8 घं 38 मि · Tithika की परिपाटी

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 26 नवंबर
  • 07:58व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 27 नवंबर
  • 08:57–17:35पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में उत्पन्ना एकादशी मंगल 26 नवंबर को क्यों है?

उत्पन्ना एकादशी मंगल 26 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:32 सोम से 02:18 बुध तक।

एकादशी 02:18 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 26 नवंबर को सूर्योदय पर है, 07:58: मंगल 26 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:32 सोम पर, उससे (06:22–07:58) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 27 नवंबर, 08:57–17:35 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 27 नवंबर 02:18 से गुरु 28 नवंबर 04:54 तक है; हरिवासर 08:57 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:35) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:55 तक, करते हैं।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।