tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 2015 पारण समय 09:26⁠–⁠19:38, सोम 7 दिसंबर

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 2015 कब है?

रविवार 6 दिसंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 6 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 7 दिसंबर

पारण समय
09:26–19:38
10 घं 12 मि · Tithika की परिपाटी

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 6 दिसंबर
  • 06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 7 दिसंबर
  • 09:26–19:38पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी रवि 6 दिसंबर को क्यों है?

उत्पन्ना एकादशी रवि 6 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:18 से 02:53 सोम तक।

एकादशी 02:53 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 00:18 रवि से 02:53 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 6 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:29: रवि 6 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:18 पर, उससे (04:53–06:29) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 7 दिसंबर, 09:26–19:38 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 7 दिसंबर 02:53 से मंगल 8 दिसंबर 05:05 तक है; हरिवासर 09:26 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:38) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:07 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।