Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 2007 पारण समय 12:35–19:37, बुध 5 दिसंबर
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 2007 कब है?
मंगलवार 4 दिसंबर
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 4 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
बुधवार 5 दिसंबर
उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण
- मंगलवार 4 दिसंबर
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06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 5 दिसंबर
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12:35–19:37पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में उत्पन्ना एकादशी मंगल 4 दिसंबर को क्यों है?
उत्पन्ना एकादशी मंगल 4 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:23 से 05:56 बुध तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:56 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 03:23 मंगल से 05:56 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 4 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:29: मंगल 4 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:23 पर, उससे (04:53–06:29) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 5 दिसंबर, 12:35–19:37 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 5 दिसंबर 05:56 से गुरु 6 दिसंबर 08:34 तक है; हरिवासर 12:35 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:37) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:06 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
नियम
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।