tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 1990 पारण समय 06:29⁠–⁠19:24, मंगल 13 नवंबर

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 1990 कब है?

सोमवार 12 नवंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 12 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 13 नवंबर

पारण समय
06:29–19:24
12 घं 55 मि · Tithika की परिपाटी

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 12 नवंबर
  • 06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 13 नवंबर
  • 06:29–19:24पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी सोम 12 नवंबर को क्यों है?

उत्पन्ना एकादशी सोम 12 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:53 रवि से 23:47 तक।

एकादशी 23:47 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 12 नवंबर को सूर्योदय पर है, 06:29: सोम 12 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:53 रवि पर, उससे (04:53–06:29) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 13 नवंबर, 06:29–19:24 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 12 नवंबर 23:47 से बुध 14 नवंबर 01:06 तक है; हरिवासर 06:07 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 13 नवंबर को सूर्योदय (06:29) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:24) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:04 तक, करते हैं।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।