tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 1982 पारण समय 06:11⁠–⁠18:41, शनि 11 दिसंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 1982 कब है?

शुक्रवार 10 दिसंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 10 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 11 दिसंबर

पारण समय
06:11–18:41
12 घं 30 मि · Tithika की परिपाटी

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 10 दिसंबर
  • 05:30व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 11 दिसंबर
  • 06:11–18:41पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी शुक्र 10 दिसंबर को क्यों है?

उत्पन्ना एकादशी शुक्र 10 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:32 गुरु से 23:57 तक।

एकादशी 23:57 शुक्र पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 10 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:30: शुक्र 10 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:32 गुरु पर, उससे (03:54–05:30) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 11 दिसंबर, 06:11–18:41 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 10 दिसंबर 23:57 से रवि 12 दिसंबर 00:53 तक है; हरिवासर 06:11 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:41) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:08 तक, करते हैं।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।