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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 1908 पारण समय 05:28⁠–⁠18:05, शुक्र 20 नवंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 1908 कब है?

गुरुवार 19 नवंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 19 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 20 नवंबर

पारण समय
05:28–18:05
12 घं 37 मि

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 19 नवंबर
  • 05:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 20 नवंबर
  • 05:28–18:05पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी गुरु 19 नवंबर को क्यों है?

उत्पन्ना एकादशी गुरु 19 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 14:40 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 14:40 बुध से 16:35 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 19 नवंबर को सूर्योदय पर है, 05:22: गुरु 19 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 14:40 बुध पर, उससे (03:46–05:22) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 20 नवंबर, 05:28–18:05

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 19 नवंबर 16:35 से शुक्र 20 नवंबर 17:59 तक है; हरिवासर 22:56 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 20 नवंबर को सूर्योदय (05:22) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 07:58 तक, करते हैं।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।