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Pāthardi, महाराष्ट्र में श्रावण पुत्रदा एकादशी 2021 पारण समय 06:33⁠–⁠18:54, गुरु 19 अगस्त

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में श्रावण पुत्रदा एकादशी 2021 कब है?

बुधवार 18 अगस्त

श्रावण शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में बुध 18 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 19 अगस्त

पारण समय
06:33–18:54
12 घं 21 मि · Tithika की परिपाटी

श्रावण पुत्रदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 18 अगस्त
  • 06:10व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 19 अगस्त
  • 06:33–18:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंश्रावण पुत्रदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में श्रावण पुत्रदा एकादशी बुध 18 अगस्त को क्यों है?

श्रावण पुत्रदा एकादशी बुध 18 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:21 से 01:06 गुरु तक।

एकादशी 01:06 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 18 अगस्त को सूर्योदय पर है, 06:10: बुध 18 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:21 पर, उससे (04:34–06:10) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 19 अगस्त, 06:33–18:54 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 19 अगस्त 01:06 से गुरु 19 अगस्त 22:54 तक है; हरिवासर 06:33 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:54) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं।

नियम

श्रावण शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।