Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में षटतिला एकादशी 2027 पारण समय 08:08–12:20, बुध 3 फ़रवरी
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में षटतिला एकादशी 2027 कब है?
मंगलवार 2 फ़रवरी
माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Sevan में मंगल 2 फ़रवरी का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
बुधवार 3 फ़रवरी
षटतिला एकादशी का समय: व्रत, पारण
- मंगलवार 2 फ़रवरी
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08:09व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 3 फ़रवरी
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08:08–12:20पारण समयव्रत खोलने का समय
Sevan में षटतिला एकादशी मंगल 2 फ़रवरी को क्यों है?
षटतिला एकादशी मंगल 2 फ़रवरी को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 07:11 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 07:11 से 09:40 मंगल तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 07:11 सोम से 09:40 तक।
द्वादशी: 09:40 मंगल से 12:20 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, सोम 1 फ़रवरी को 08:09 और मंगल 2 फ़रवरी को 08:09। एकादशी (सोम 1 फ़रवरी 07:11 से मंगल 2 फ़रवरी 09:40 तक) और द्वादशी (मंगल 2 फ़रवरी 09:40 से बुध 3 फ़रवरी 12:20 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: मंगल 2 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: सोम 1 फ़रवरी को दशमी 07:11 तक है, उसके भीतर (06:33–08:09); मंगल 2 फ़रवरी को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 3 फ़रवरी, 08:08–12:20
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 2 फ़रवरी 09:40 से बुध 3 फ़रवरी 12:20 तक है; हरिवासर 16:20 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 3 फ़रवरी को सूर्योदय (08:08) से होता है।
नियम
माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।