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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में षटतिला एकादशी 2025 पारण समय 08:14⁠–⁠18:10, रवि 26 जनवरी

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में षटतिला एकादशी 2025 कब है?

शनिवार 25 जनवरी

माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में शनि 25 जनवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 26 जनवरी

पारण समय
08:14–18:10
9 घं 56 मि · Tithika की परिपाटी

षटतिला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 25 जनवरी
  • 08:15व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 26 जनवरी
  • 08:14–18:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंषटतिला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में षटतिला एकादशी शनि 25 जनवरी को क्यों है?

षटतिला एकादशी शनि 25 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 17:55 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 17:55 शुक्र से 19:02 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 25 जनवरी को सूर्योदय पर है, 08:15: शनि 25 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 17:55 शुक्र पर, उससे (06:39–08:15) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 26 जनवरी, 08:14–18:10 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 25 जनवरी 19:02 से रवि 26 जनवरी 19:25 तक है; हरिवासर 01:08 पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 26 जनवरी को सूर्योदय (08:14) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:10) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 10:13 तक, करते हैं।

नियम

माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।