Pāthardi, महाराष्ट्र में षटतिला एकादशी 2021 रवि 7 फ़रवरी या सोम 8 फ़रवरी
महाराष्ट्र, भारत
व्रत · समय IST में
Pāthardi में षटतिला एकादशी 2021 कब है?
स्मार्त
रविवार 7 फ़रवरी
वैष्णव
सोमवार 8 फ़रवरी
माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Pāthardi में रवि 7 फ़रवरी का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · सोमवार 8 फ़रवरी
वैष्णव · मंगलवार 9 फ़रवरी
षटतिला एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- रविवार 7 फ़रवरी
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07:01व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 8 फ़रवरी
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10:25–18:25पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- सोमवार 8 फ़रवरी
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07:01व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 9 फ़रवरी
-
07:00–18:26पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Pāthardi में षटतिला एकादशी रवि 7 फ़रवरी या सोम 8 फ़रवरी को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में षटतिला एकादशी रवि 7 फ़रवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 8 फ़रवरी को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:26 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:26 से 04:47 सोम तक।
एकादशी 04:47 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:26 रवि से 04:47 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 7 फ़रवरी को सूर्योदय पर है, 07:01: रवि 7 फ़रवरी।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 7 फ़रवरी को दशमी 06:26 तक है, अरुणोदय (05:25–07:01) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 04:47 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 8 फ़रवरी को व्रत रखते हैं: सोम 8 फ़रवरी।
व्रत का पारण
स्मार्त · सोम 8 फ़रवरी, 10:25–18:25 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 8 फ़रवरी 04:47 से मंगल 9 फ़रवरी 03:20 तक है; हरिवासर 10:25 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:25) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:18 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · मंगल 9 फ़रवरी, 07:00–18:26 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी मंगल 9 फ़रवरी को 03:20 पर, रात में, अरुणोदय (05:24) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (07:00) से सूर्यास्त (18:26) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।