tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में षटतिला एकादशी 1997 पारण समय 07:43⁠–⁠19:51, मंगल 4 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में षटतिला एकादशी 1997 कब है?

सोमवार 3 फ़रवरी

माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 3 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 4 फ़रवरी

पारण समय
07:43–19:51
12 घं 8 मि · Tithika की परिपाटी

षटतिला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 3 फ़रवरी
  • 07:01व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 4 फ़रवरी
  • 07:43–19:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंषटतिला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में षटतिला एकादशी सोम 3 फ़रवरी को क्यों है?

षटतिला एकादशी सोम 3 फ़रवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:21 से 02:23 मंगल तक।

एकादशी 02:23 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 3 फ़रवरी को सूर्योदय पर है, 07:01: सोम 3 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 04:21 पर, उससे (05:25–07:01) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 4 फ़रवरी, 07:43–19:51 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 4 फ़रवरी 02:23 से मंगल 4 फ़रवरी 23:42 तक है; हरिवासर 07:43 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:51) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:35 तक, करते हैं।

नियम

माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।