tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में षटतिला एकादशी 1985 पारण समय 08:16⁠–⁠18:54, गुरु 17 जनवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में षटतिला एकादशी 1985 कब है?

बुधवार 16 जनवरी

माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 16 जनवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 17 जनवरी

पारण समय
08:16–18:54
10 घं 38 मि · Tithika की परिपाटी

षटतिला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 16 जनवरी
  • 05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 17 जनवरी
  • 08:16–18:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंषटतिला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में षटतिला एकादशी बुध 16 जनवरी को क्यों है?

षटतिला एकादशी बुध 16 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:01 से 02:35 गुरु तक।

एकादशी 02:35 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:01 बुध से 02:35 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 16 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:50: बुध 16 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 04:01 पर, उससे (04:14–05:50) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 17 जनवरी, 08:16–18:54 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 17 जनवरी 02:35 से शुक्र 18 जनवरी 01:21 तक है; हरिवासर 08:16 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:54) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:28 तक, करते हैं।

नियम

माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।