tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में षटतिला एकादशी 1982 पारण समय 05:53⁠–⁠18:54, गुरु 21 जनवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में षटतिला एकादशी 1982 कब है?

बुधवार 20 जनवरी

माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 20 जनवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 21 जनवरी

पारण समय
05:53–18:54
13 घं 1 मि · Tithika की परिपाटी

षटतिला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 20 जनवरी
  • 05:53व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 21 जनवरी
  • 05:53–18:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंषटतिला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में षटतिला एकादशी बुध 20 जनवरी को क्यों है?

षटतिला एकादशी बुध 20 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 14:38 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 14:38 मंगल से 17:19 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 20 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:53: बुध 20 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 14:38 मंगल पर, उससे (04:17–05:53) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 21 जनवरी, 05:53–18:54 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 20 जनवरी 17:19 से गुरु 21 जनवरी 19:56 तक है; हरिवासर 23:58 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 21 जनवरी को सूर्योदय (05:53) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:54) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:29 तक, करते हैं।

नियम

माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।