Pāthardi, महाराष्ट्र में सफला एकादशी 2027 2027 में 2 तारीख़ें
महाराष्ट्र, भारत
व्रत · समय IST में
Pāthardi में सफला एकादशी 2027 कब है?
2027 में दो बार
रविवार 3 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Pāthardi में रवि 3 जनवरी का पूरा पंचांगगुरुवार 23 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Pāthardi में गुरु 23 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
सोमवार 4 जनवरी
शुक्रवार 24 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
रवि 3 जनवरी
-
07:03व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 4 जनवरी
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07:03–18:04पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
गुरु 23 दिसंबर
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06:58व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 24 दिसंबर
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06:59–17:57पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
रवि 3 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी रवि 3 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 14:24 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 14:24 शनि से 16:08 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 3 जनवरी को सूर्योदय पर है, 07:03: रवि 3 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 14:24 शनि पर, उससे (05:27–07:03) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · सोम 4 जनवरी, 07:03–18:04 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 3 जनवरी 16:08 से सोम 4 जनवरी 18:16 तक है; हरिवासर 22:40 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 4 जनवरी को सूर्योदय (07:03) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:04) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:15 तक, करते हैं।
गुरु 23 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी गुरु 23 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:41 बुध से 23:12 तक।
एकादशी 23:12 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 23 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:58: गुरु 23 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:41 बुध पर, उससे (05:22–06:58) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 24 दिसंबर, 06:59–17:57 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 23 दिसंबर 23:12 से शुक्र 24 दिसंबर 23:08 तक है; हरिवासर 05:11 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 24 दिसंबर को सूर्योदय (06:59) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:57) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:10 तक, करते हैं।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।