Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2100 2100 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2100 कब है?
2100 में दो बार
बुधवार 6 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में बुध 6 जनवरी का पूरा पंचांगसोमवार 27 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 27 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
गुरुवार 7 जनवरी
मंगलवार 28 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
बुध 6 जनवरी
-
05:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 7 जनवरी
-
05:44–13:30पारण समयव्रत खोलने का समय
सोम 27 दिसंबर
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05:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 28 दिसंबर
-
05:38–06:46पारण समयव्रत खोलने का समय
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
बुध 6 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी बुध 6 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 17:10 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 17:10 मंगल से 15:16 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 6 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:44: बुध 6 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 17:10 मंगल पर, उससे (04:08–05:44) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · गुरु 7 जनवरी, 05:44–13:30
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 6 जनवरी 15:16 से गुरु 7 जनवरी 13:30 तक है; हरिवासर 20:50 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 7 जनवरी को सूर्योदय (05:44) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:22 तक, करते हैं।
सोम 27 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी सोम 27 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 12:45 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 12:45 रवि से 09:55 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 27 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:38: सोम 27 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 12:45 रवि पर, उससे (04:02–05:38) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 28 दिसंबर, 05:38–06:46
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 27 दिसंबर 09:55 से मंगल 28 दिसंबर 06:46 तक है; हरिवासर 15:07 सोम पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 28 दिसंबर को सूर्योदय (05:38) से होता है।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।