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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2084 2084 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 2084 कब है?

2084 में दो बार

स्मार्त

सोमवार 3 जनवरी

वैष्णव

मंगलवार 4 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में सोम 3 जनवरी का पूरा पंचांग

शनिवार 23 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 23 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · मंगलवार 4 जनवरी

पारण समय
09:17–18:52
9 घं 35 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · बुधवार 5 जनवरी

पारण समय
05:43–18:52
13 घं 9 मि · Tithika की परिपाटी

रविवार 24 दिसंबर

पारण समय
05:37–15:09
9 घं 32 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

सोम 3 जनवरी

स्मार्त

  • सोमवार 3 जनवरी
  • 05:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 4 जनवरी
  • 09:17–18:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • मंगलवार 4 जनवरी
  • 05:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 5 जनवरी
  • 05:43–18:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

शनि 23 दिसंबर

  • 05:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 24 दिसंबर
  • 05:37–15:09पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

सोम 3 जनवरी और मंगल 4 जनवरी क्यों?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में सफला एकादशी सोम 3 जनवरी को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 4 जनवरी को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:47 से। एकादशी: 06:47 से 04:05 मंगल तक।

एकादशी 04:05 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:47 सोम से 04:05 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह सोम 3 जनवरी को 06:47 पर, उस सूर्योदय (05:42) के बाद, लगती है और मंगल 4 जनवरी को 04:05 पर, अगले सूर्योदय (05:42 मंगल) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: सोम 3 जनवरी।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 3 जनवरी को अरुणोदय (04:06–05:42) में दशमी है। मंगल 4 जनवरी को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:05 तक, फिर द्वादशी): मंगल 4 जनवरी।

व्रत का पारण

स्मार्त · मंगल 4 जनवरी, 09:17–18:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 4 जनवरी 04:05 से बुध 5 जनवरी 00:55 तक है; हरिवासर 09:17 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:20 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · बुध 5 जनवरी, 05:43–18:52 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी बुध 5 जनवरी को 00:55 पर, रात में, अरुणोदय (04:07) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:43) से सूर्यास्त (18:52) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

शनि 23 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी शनि 23 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:18 शुक्र से 17:06 तक।

एकादशी 17:06 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 23 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:36: शनि 23 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:18 शुक्र पर, उससे (04:00–05:36) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 24 दिसंबर, 05:37–15:09

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 23 दिसंबर 17:06 से रवि 24 दिसंबर 15:09 तक है; हरिवासर 22:37 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 24 दिसंबर को सूर्योदय (05:37) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:15 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।