Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2076 2076 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2076 कब है?
2076 में दो बार
गुरुवार 2 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 2 जनवरी का पूरा पंचांगसोमवार 21 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 21 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शुक्रवार 3 जनवरी
मंगलवार 22 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
गुरु 2 जनवरी
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05:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 3 जनवरी
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05:42–17:16पारण समयव्रत खोलने का समय
सोम 21 दिसंबर
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05:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 22 दिसंबर
-
08:32–18:47पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
गुरु 2 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी गुरु 2 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:25 बुध से 19:41 तक।
एकादशी 19:41 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 2 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:41: गुरु 2 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:25 बुध पर, उससे (04:05–05:41) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 3 जनवरी, 05:42–17:16
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 2 जनवरी 19:41 से शुक्र 3 जनवरी 17:16 तक है; हरिवासर 01:05 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 3 जनवरी को सूर्योदय (05:42) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:20 तक, करते हैं।
सोम 21 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी सोम 21 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:59 से 02:34 मंगल तक।
एकादशी 02:34 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 01:59 सोम से 02:34 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 21 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:35: सोम 21 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:59 पर, उससे (03:59–05:35) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 22 दिसंबर, 08:32–18:47 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 22 दिसंबर 02:34 से बुध 23 दिसंबर 02:25 तक है; हरिवासर 08:32 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:47) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:14 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।