Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2073 2073 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2073 कब है?
2073 में दो बार
बुधवार 4 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में बुध 4 जनवरी का पूरा पंचांगरविवार 24 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 24 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
गुरुवार 5 जनवरी
सोमवार 25 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
बुध 4 जनवरी
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05:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 5 जनवरी
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05:44–05:54पारण समयव्रत खोलने का समय
रवि 24 दिसंबर
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05:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 25 दिसंबर
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06:06–18:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
बुध 4 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी बुध 4 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:14 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 08:14 मंगल से 06:55 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 4 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:43: बुध 4 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 08:14 मंगल पर, उससे (04:07–05:43) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · गुरु 5 जनवरी, 05:44–05:54
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 4 जनवरी 06:55 से गुरु 5 जनवरी 05:54 तक है; हरिवासर 12:40 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 5 जनवरी को सूर्योदय (05:44) से होता है।
रवि 24 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी रवि 24 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:33 से 00:49 सोम तक।
एकादशी 00:49 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 24 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:36: रवि 24 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:33 पर, उससे (04:00–05:36) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · सोम 25 दिसंबर, 06:06–18:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 25 दिसंबर 00:49 से सोम 25 दिसंबर 21:57 तक है; हरिवासर 06:06 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:48) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:15 तक, करते हैं।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।