tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2071 बुध 16 दिसंबर या गुरु 17 दिसंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 2071 कब है?

स्मार्त

बुधवार 16 दिसंबर

वैष्णव

गुरुवार 17 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में बुध 16 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · गुरुवार 17 दिसंबर

पारण समय
11:36–18:44
7 घं 8 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · शुक्रवार 18 दिसंबर

पारण समय
05:33–05:47
14 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • बुधवार 16 दिसंबर
  • 05:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 17 दिसंबर
  • 11:36–18:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • गुरुवार 17 दिसंबर
  • 05:33व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 18 दिसंबर
  • 05:33–05:47पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में सफला एकादशी बुध 16 दिसंबर या गुरु 17 दिसंबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में सफला एकादशी बुध 16 दिसंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव गुरु 17 दिसंबर को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 05:42 से। एकादशी: 05:42 से 05:33 गुरु तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:33 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 05:42 बुध से 05:33 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह बुध 16 दिसंबर को 05:42 पर, उस सूर्योदय (05:32) के बाद, लगती है और गुरु 17 दिसंबर को 05:33 पर, अगले सूर्योदय (05:33 गुरु) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: बुध 16 दिसंबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 16 दिसंबर को अरुणोदय (03:56–05:32) में दशमी है। गुरु 17 दिसंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:33 तक, फिर द्वादशी): गुरु 17 दिसंबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · गुरु 17 दिसंबर, 11:36–18:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 17 दिसंबर 05:33 से शुक्र 18 दिसंबर 05:47 तक है; हरिवासर 11:36 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:11 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · शुक्र 18 दिसंबर, 05:33–05:47

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 17 दिसंबर 05:33 से शुक्र 18 दिसंबर 05:47 तक है; हरिवासर 11:36 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 18 दिसंबर को सूर्योदय (05:33) से होता है।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।