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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2068 2068 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 2068 कब है?

2068 में दो बार

रविवार 1 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 1 जनवरी का पूरा पंचांग

गुरुवार 20 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 20 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 2 जनवरी

पारण समय
05:41–06:17
36 मि

शुक्रवार 21 दिसंबर

पारण समय
05:35–09:30
3 घं 55 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

रवि 1 जनवरी

  • 05:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 2 जनवरी
  • 05:41–06:17पारण समयव्रत खोलने का समय

गुरु 20 दिसंबर

  • 05:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 21 दिसंबर
  • 05:35–09:30पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

रवि 1 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी रवि 1 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:15 से। एकादशी: 07:15 से 07:10 रवि तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 07:15 शनि से 07:10 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 1 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:41: रवि 1 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 07:15 शनि पर, उससे (04:05–05:41) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 2 जनवरी, 05:41–06:17

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 1 जनवरी 07:10 से सोम 2 जनवरी 06:17 तक है; हरिवासर 12:57 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 2 जनवरी को सूर्योदय (05:41) से होता है।

गुरु 20 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी गुरु 20 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 05:39 से। एकादशी: 05:39 से 07:50 गुरु तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:39 बुध से 07:50 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 20 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:34: गुरु 20 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 05:39 बुध पर, उससे (03:58–05:34) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 21 दिसंबर, 05:35–09:30

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 20 दिसंबर 07:50 से शुक्र 21 दिसंबर 09:30 तक है; हरिवासर 14:15 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 21 दिसंबर को सूर्योदय (05:35) से होता है।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।