Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2062 2062 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2062 कब है?
2062 में दो बार
गुरुवार 5 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 5 जनवरी का पूरा पंचांगमंगलवार 26 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 26 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शुक्रवार 6 जनवरी
बुधवार 27 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
गुरु 5 जनवरी
-
05:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 6 जनवरी
-
11:28–18:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
मंगल 26 दिसंबर
-
05:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 27 दिसंबर
-
05:38–09:01पारण समयव्रत खोलने का समय
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
गुरु 5 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी गुरु 5 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:25 से 04:49 शुक्र तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 04:49 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 02:25 गुरु से 04:49 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 5 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:43: गुरु 5 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:25 पर, उससे (04:07–05:43) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 6 जनवरी, 11:28–18:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 6 जनवरी 04:49 से शनि 7 जनवरी 07:24 तक है; हरिवासर 11:28 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:22 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
मंगल 26 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी मंगल 26 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:39 से। एकादशी: 07:39 से 08:07 मंगल तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 07:39 सोम से 08:07 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 26 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:37: मंगल 26 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 07:39 सोम पर, उससे (04:01–05:37) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 27 दिसंबर, 05:38–09:01
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 26 दिसंबर 08:07 से बुध 27 दिसंबर 09:01 तक है; हरिवासर 14:21 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 27 दिसंबर को सूर्योदय (05:38) से होता है।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।